पूरा नाम अटल बिहारी वाजपेयी
जन्म 25 दिसंबर, 1924
जन्म भूमि ग्वालियर, मध्य प्रदेश
अविभावक पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेयी और श्रीमती कृष्णा देवी
पति/पत्नी अविवाहित
नागरिकता भारतीय
पार्टी भारतीय जनता पार्टी, भारतीय जनसंघ
पद भारत के 11वें प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री
कार्य काल प्रधानमंत्री-16 मई 1996 – 1 जून 1996 और 19 मार्च 1998 – 19 मई 2004
विदेश मंत्री- 26 मार्च 1977 – 28 जुलाई 1979
शिक्षा स्नातकोत्तर
विद्यालय गोरखी विद्यालय, विक्टोरिया स्कूल (अब रानी लक्ष्मीबाई कॉलेज), डी.ए.वी. महाविद्यालय
भाषा हिन्दी, अंग्रेज़ी
पुरस्कार-उपाधि पद्म विभूषण, भारत रत्न
धर्म हिन्दू
विशेष जवाहरलाल नेहरू के बाद इनको देश का दूसरा स्टेट्समैन कहा गया।
अन्य जानकारी अटल बिहारी वाजपेयी ने विज्ञान और तकनीक की प्रगति के साथ देश का भविष्य जोड़ा। उन्होंने परमाणु शक्ति को देश के लिए आवश्यक बताकर 11 मई, 1998 को पोखरन में पाँच परमाणु परीक्षण किए।
अद्यतन
20:06, 27 मार्च 2015 (IST)
अटल बिहारी वाजपेयी (अंग्रेज़ी: Atal Bihari Vajpayee, जन्म- 25 दिसंबर, 1924) का नाम भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय प्रधानमंत्रियों में लिया जाता है। नरसिम्हा राव के बाद 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी मात्र 13 दिन के लिए ही प्रधानमंत्री बने। इसके बाद 1998 में हुए चुनावों के माध्यम से वह दोबारा प्रधानमंत्री बने। इस कारण 1996 और 1998 के मध्य बने दो प्रधानमंत्रियों-एच. डी. देवगौड़ा तथा इन्द्र कुमार गुजराल को आगे स्थान दिया गया है। तत्पश्चात् अटल बिहारी वाजपेयी अक्टूबर, 1999 में पुन: प्रधानमंत्री बने और यह कार्यकाल उन्होंने अत्यन्त सफलतापूर्वक पूर्ण किया। इसके पूर्व वह अप्रैल 1999 से अक्टूबर 1999 तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री भी रहे।
संक्षिप्त परिचय
25 दिसंबर, 1925 को ग्वालियर में जन्म हुआ। अंग्रेज़ी राज के ख़िलाफ़ भारत छोड़ो आंदोलन (1942-45) के दौर से राजनीतिक सफर शुरू किया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पत्रिका निकालने के लिए वकालत की पढ़ाई छोड़ी।
भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के निकट रहे। 1953 में कश्मीर मसले पर मुखर्जी के आंदोलन के दौरान वह उनके साथ थे।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जेल में असमय मृत्यु का वाजपेयी पर गहरा असर पड़ा था। उसके बाद जनसंघ की कमान संभाली।
भाजपा का उदार चेहरा कहा गया। पिछली सदी के अंतिम दशक में भाजपा को राजनीति के केंद्र में लाने में अहम योगदान दिया।
1957 में पहली बार लोकसभा पहुंचे।
सर्वाधिक समय तक गैरकांग्रेसी प्रधानमंत्री रहने वाले एकमात्र राजनेता हैं।
भारत और पाकिस्तान के बीच तल्ख रिश्तों को सुधारने का प्रयास किया। 1999 में लाहौर बस यात्रा की।
चार दशक तक विपक्ष में रहने के बाद 1996 में पहली बार प्रधानमंत्री बने, लेकिन 13 दिन तक ही रह पाए। 1998 में दूसरी बार 13 महीने की सरकार जयललिता के समर्थन वापस लेने के कारण गिरी। 1999 में तीसरी बार प्रधानमंत्री रहे और कार्यकाल पूरा किया।
1998 में पोखरण परीक्षण करके दृढ़ नेतृत्व का परिचय दिया और विश्व को भारत की परमाणु क्षमता का अहसास कराया।
जवाहरलाल नेहरू के बाद इनको देश का दूसरा स्टेट्समैन कहा गया।
इनकी सादगी, नैतिकता और उच्च आदर्शो का लोहा विपक्षी भी मानते हैं।
राजनीति में अमूल्य योगदान के लिए भारत सरकार ने इन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया। इसके अतिरिक्त ये पद्म विभूषण से भी सम्मानित हैं।
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