गुरुवार, 7 मई 2015

Zakir Hussain


पूरा नाम डॉ. ज़ाकिर हुसैन
जन्म 8 फ़रवरी, 1897
जन्म भूमि हैदराबाद, आंध्र प्रदेश
मृत्यु 3 मई, 1969
मृत्यु स्थान दिल्ली
अविभावक पिता- फ़िदा हुसैन खान
पति/पत्नी शाहजेहन बेगम
नागरिकता भारतीय
प्रसिद्धि भारत के तीसरे राष्ट्रपति
पार्टी कांग्रेस
पद राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, बिहार के राज्यपाल
कार्य काल राष्ट्रपति- 13 मई 1967 से 3 मई 1969 तक, उपराष्ट्रपति- 13 मई 1962 से 12 मई 1967 तक, राज्यपाल- 6 जुलाई 1957 से 11 मई 1962 तक
शिक्षा पी.एच.डी
विद्यालय बर्लिन विश्वविद्यालय
भाषा हिंदी
पुरस्कार-उपाधि भारत रत्न (1963), पद्म विभूषण (1954)
अन्य जानकारी भारतीय प्रेस आयोग, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूनेस्को, अन्तर्राष्ट्रीय शिक्षा सेवा तथा केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से भी जुड़े रहे।
डॉ. ज़ाकिर हुसैन (अंग्रेज़ी: Zakir Hussain, जन्म: 8 फ़रवरी, 1897 - मृत्यु: 3 मई, 1969) भारत के तीसरे राष्ट्रपति थे। उनका राष्ट्रपति कार्यकाल 13 मई 1967 से 3 मई 1969 तक रहा। डॉ. जाकिर हुसैन मशहूर शिक्षाविद् और आधुनिक भारत के दृष्टा थे। ये बिहार के राज्यपाल (कार्यकाल- 1957 से 1962 तक) और भारत के उपराष्ट्रपति (कार्यकाल- 1962 से 1967 तक) भी रहे। उन्हें वर्ष 1963 मे भारत रत्न से सम्मानित किया गया। 1969 में असमय देहावसान के कारण वे अपना राष्ट्रपति कार्यकाल पूरा नहीं कर सके।
जीवन परिचय

डॉ. ज़ाकिर हुसैन का जन्म 8 फ़रवरी, 1897 ई. में हैदराबाद, आंध्र प्रदेश के धनाढ्य पठान परिवार में हुआ था। कुछ समय बाद इनके पिता उत्तर प्रदेश में रहने आ गये थे। केवल 23 वर्ष की अवस्था में वे 'जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय' की स्थापना दल के सदस्य बने। वे अर्थशास्त्र में पी.एच.डी की डिग्री के लिए जर्मनी के बर्लिन विश्वविद्यालय गए और लौट कर जामिया के उप कुलपति के पद पर भी आसीन हुए। 1920 में उन्होंने 'जामिया मिलिया इस्लामिया' की स्थापना में योगदान दिया तथा इसके उपकुलपति बने। इनके नेतृत्व में जामिया मिलिया इस्लामिया का राष्ट्रवादी कार्यों तथा स्वाधीनता संग्राम की ओर झुकाव रहा। स्वतन्त्रता प्राप्ति के पश्चात वे अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति बने तथा उनकी अध्यक्षता में ‘विश्वविद्यालय शिक्षा आयोग’ भी गठित किया गया। इसके अलावा वे भारतीय प्रेस आयोग, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग, यूनेस्को, अन्तर्राष्ट्रीय शिक्षा सेवा तथा केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड से भी जुड़े रहे। 1962 ई. में वे भारत के उपराष्ट्रपति बने।[1]
कार्यक्षेत्र

डॉ. ज़ाकिर हुसैन भारत के राष्ट्रपति बनने वाले पहले मुसलमान थे। देश के युवाओं से सरकारी संस्थानों का वहिष्कार की गाँधी की अपील का हुसैन ने पालन किया। उन्होंने अलीगढ़ में मुस्लिम नेशनल यूनिवर्सिटी (बाद में दिल्ली ले जायी गई) की स्थापना में मदद की और 1926 से 1948 तक इसके कुलपति रहे। महात्मा गाँधी के निमन्त्रण पर वह प्राथमिक शिक्षा के राष्ट्रीय आयोग के अध्यक्ष भी बने, जिसकी स्थापना 1937 में स्कूलों के लिए गाँधीवादी पाठ्यक्रम बनाने के लिए हुई थी। 1948 में हुसैन अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के कुलपति बने और चार वर्ष के बाद उन्होंने राज्यसभा में प्रवेश किया। 1956-58 में वह संयुक्त राष्ट्र शिक्षा, विज्ञान और संस्कृति संगठन (यूनेस्को) की कार्यकारी समिति में रहे। 1957 में उन्हें बिहार का राज्यपाल नियुक्त किया गया और 1962 में वह भारत के उपराष्ट्रपति निर्वाचित हुए। 1967 में कांग्रेस पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार के रूप में वह भारत के राष्ट्रपति पद के लिए चुने गये और मृत्यु तक पदासीन रहे।[2]

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पूरा नाम अटल बिहारी वाजपेयी
जन्म 25 दिसंबर, 1924
जन्म भूमि ग्वालियर, मध्य प्रदेश
अविभावक पंडित कृष्ण बिहारी वाजपेयी और श्रीमती कृष्णा देवी
पति/पत्नी अविवाहित
नागरिकता भारतीय
पार्टी भारतीय जनता पार्टी, भारतीय जनसंघ
पद भारत के 11वें प्रधानमंत्री, विदेश मंत्री
कार्य काल प्रधानमंत्री-16 मई 1996 – 1 जून 1996 और 19 मार्च 1998 – 19 मई 2004
विदेश मंत्री- 26 मार्च 1977 – 28 जुलाई 1979
शिक्षा स्नातकोत्तर
विद्यालय गोरखी विद्यालय, विक्टोरिया स्कूल (अब रानी लक्ष्मीबाई कॉलेज), डी.ए.वी. महाविद्यालय
भाषा हिन्दी, अंग्रेज़ी
पुरस्कार-उपाधि पद्म विभूषण, भारत रत्न
धर्म हिन्दू
विशेष जवाहरलाल नेहरू के बाद इनको देश का दूसरा स्टेट्समैन कहा गया।
अन्य जानकारी अटल बिहारी वाजपेयी ने विज्ञान और तकनीक की प्रगति के साथ देश का भविष्य जोड़ा। उन्होंने परमाणु शक्ति को देश के लिए आवश्यक बताकर 11 मई, 1998 को पोखरन में पाँच परमाणु परीक्षण किए।
अद्यतन‎
20:06, 27 मार्च 2015 (IST)
अटल बिहारी वाजपेयी (अंग्रेज़ी: Atal Bihari Vajpayee, जन्म- 25 दिसंबर, 1924) का नाम भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय प्रधानमंत्रियों में लिया जाता है। नरसिम्हा राव के बाद 1996 में अटल बिहारी वाजपेयी मात्र 13 दिन के लिए ही प्रधानमंत्री बने। इसके बाद 1998 में हुए चुनावों के माध्यम से वह दोबारा प्रधानमंत्री बने। इस कारण 1996 और 1998 के मध्य बने दो प्रधानमंत्रियों-एच. डी. देवगौड़ा तथा इन्द्र कुमार गुजराल को आगे स्थान दिया गया है। तत्पश्चात् अटल बिहारी वाजपेयी अक्टूबर, 1999 में पुन: प्रधानमंत्री बने और यह कार्यकाल उन्होंने अत्यन्त सफलतापूर्वक पूर्ण किया। इसके पूर्व वह अप्रैल 1999 से अक्टूबर 1999 तक कार्यवाहक प्रधानमंत्री भी रहे।
संक्षिप्त परिचय

25 दिसंबर, 1925 को ग्वालियर में जन्म हुआ। अंग्रेज़ी राज के ख़िलाफ़ भारत छोड़ो आंदोलन (1942-45) के दौर से राजनीतिक सफर शुरू किया।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पत्रिका निकालने के लिए वकालत की पढ़ाई छोड़ी।
भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी के निकट रहे। 1953 में कश्मीर मसले पर मुखर्जी के आंदोलन के दौरान वह उनके साथ थे।
श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जेल में असमय मृत्यु का वाजपेयी पर गहरा असर पड़ा था। उसके बाद जनसंघ की कमान संभाली।
भाजपा का उदार चेहरा कहा गया। पिछली सदी के अंतिम दशक में भाजपा को राजनीति के केंद्र में लाने में अहम योगदान दिया।
1957 में पहली बार लोकसभा पहुंचे।
सर्वाधिक समय तक गैरकांग्रेसी प्रधानमंत्री रहने वाले एकमात्र राजनेता हैं।
भारत और पाकिस्तान के बीच तल्ख रिश्तों को सुधारने का प्रयास किया। 1999 में लाहौर बस यात्रा की।
चार दशक तक विपक्ष में रहने के बाद 1996 में पहली बार प्रधानमंत्री बने, लेकिन 13 दिन तक ही रह पाए। 1998 में दूसरी बार 13 महीने की सरकार जयललिता के समर्थन वापस लेने के कारण गिरी। 1999 में तीसरी बार प्रधानमंत्री रहे और कार्यकाल पूरा किया।
1998 में पोखरण परीक्षण करके दृढ़ नेतृत्व का परिचय दिया और विश्व को भारत की परमाणु क्षमता का अहसास कराया।
जवाहरलाल नेहरू के बाद इनको देश का दूसरा स्टेट्समैन कहा गया।
इनकी सादगी, नैतिकता और उच्च आदर्शो का लोहा विपक्षी भी मानते हैं।
राजनीति में अमूल्य योगदान के लिए भारत सरकार ने इन्हें भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया। इसके अतिरिक्त ये पद्म विभूषण से भी सम्मानित हैं।

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पूरा नाम बाबासाहेब डॉ. भीमराव आम्बेडकर
अन्य नाम बाबासाहेब
जन्म 14 अप्रैल, 1891
जन्म भूमि मऊ, मध्य प्रदेश
मृत्यु 6 दिसंबर, 1956
मृत्यु स्थान दिल्ली
मृत्यु कारण स्वास्थ्य ख़राब
अविभावक रामजी मालोजी सकपाल, भीमाबाई मुरबादकर
पति/पत्नी रमाबाई
नागरिकता भारतीय
पार्टी स्वतंत्र लेबर पार्टी
पद अध्यक्ष- स्वतंत्र लेबर पार्टी
शिक्षा एम.ए. (अर्थशास्त्र), पी एच. डी., एम. एस. सी., बार-एट-लॉ
विद्यालय एलिफिन्सटन कॉलेज, कोलंबिया विश्वविद्यालय, लंदन स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स
भाषा हिंदी, अंग्रेज़ी
पुरस्कार-उपाधि भारत रत्न
कार्यक्षेत्र बड़ौदा राज्य के मिलिटरी सेक्रेटरी, अर्थशास्त्र के प्रोफेसर, प्रधानाचार्य
रचनाएँ 'डॉ. बाबा साहब आम्बेडकर राइटिंग्स एंड स्पीचेज' (अंग्रेज़ी), बाबा साहब डॉक्टर आम्बेडकर सम्पूर्ण वाङ्मय (हिन्दी), जाति के विनाश
अन्य जानकारी आम्बेडकर विधि विशेषज्ञ, अर्थशास्त्री, इतिहास विवेचक और धर्म और दर्शन के विद्वान थे।
डॉ. भीमराव रामजी आम्बेडकर (अंग्रेज़ी: Bhimrao Ramji Ambedkar, जन्म: 14 अप्रैल, 1891 - मृत्यु: 6 दिसंबर, 1956) एक बहुजन राजनीतिक नेता, और एक बौद्ध पुनरुत्थानवादी भी थे। उन्हें बाबासाहेब के नाम से भी जाना जाता है। आम्बेडकर ने अपना सारा जीवन हिन्दू धर्म की चतुवर्ण प्रणाली, और भारतीय समाज में सर्वत्र व्याप्त जाति व्यवस्था के विरुद्ध संघर्ष में बिता दिया। हिन्दू धर्म में मानव समाज को चार वर्णों में वर्गीकृत किया है। उन्हें बौद्ध महाशक्तियों के दलित आंदोलन को प्रारंभ करने का श्रेय भी जाता है। आम्बेडकर को भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया है जो भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है। अपनी महत्त्वपूर्ण उपलब्धियों तथा देश की अमूल्य सेवा के फलस्वरूप डॉ. अम्बेडकर को 'आधुनिक युग का मनु' कहकर सम्मानित किया गया।
जीवन परिचय

डॉ. भीमराव रामजी आम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 में हुआ था। वे रामजी मालोजी सकपाल और भीमाबाई मुरबादकर की 14वीं व अंतिम संतान थे। उनका परिवार मराठी था और वो अंबावडे नगर जो आधुनिक महाराष्ट्र के रत्नागिरी ज़िले में है, से संबंधित था। अनेक समकालीन राजनीतिज्ञों को देखते हुए उनकी जीवन-अवधि कुछ कम थी। वे महार जाति के थे जो अछूत कहे जाते थे। किन्तु इस अवधी में भी उन्होंने अध्ययन, लेखन, भाषण और संगठन के बहुत से काम किए जिनका प्रभाव उस समय की और बाद की राजनीति पर है। भीमराव आम्बेडकर का जन्म निम्न वर्ण की महार जाति में हुआ था। उस समय अंग्रेज़ निम्न वर्ण की जातियों से नौजवानों को फ़ौज में भर्ती कर रहे थे। आम्बेडकर के पूर्वज लंबे समय तक ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में कार्यरत थे और भीमराव के पिता रामजी आम्बेडकर ब्रिटिश फ़ौज में सूबेदार थे और कुछ समय तक एक फ़ौजी स्कूल में अध्यापक भी रहे। उनके पिता ने मराठी और अंग्रेज़ी में औपचारिक शिक्षा की डिग्री प्राप्त की थी। वह शिक्षा का महत्त्व समझते थे और भीमराव की पढ़ाई लिखाई पर उन्होंने बहुत ध्यान दिया।
शिक्षा
अछूत समझी जाने वाली जाति में जन्म लेने के कारण अपने स्कूली जीवन में आम्बेडकर को अनेक अपमानजनक स्थितियों का सामना करना पड़ा। इन सब स्थितियों का धैर्य और वीरता से सामना करते हुए उन्होंने स्कूली शिक्षा समाप्त की। फिर कॉलेज की पढ़ाई शुरू हुई। इस बीच पिता का हाथ तंग हुआ। खर्चे की कमी हुई। एक मित्र उन्हें बड़ौदा के शासक गायकवाड़ के यहाँ ले गए। गायकवाड़ ने उनके लिए स्कॉलरशिप की व्यवस्था कर दी और आम्बेडकर ने अपनी कॉलेज की शिक्षा पूरी की। 1907 में मैट्रिकुलेशन पास करने के बाद बड़ौदा महाराज की आर्थिक सहायता से वे एलिफिन्सटन कॉलेज से 1912 में ग्रेजुएट हुए।
1913 और 15 के बीच जब आम्बेडकर कोलंबिया विश्वविद्यालय में अध्ययन कर रहे थे, तब एम.ए. की परीक्षा के एक प्रश्न पत्र के बदले उन्होंने प्राचीन भारतीय व्यापार पर एक शोध प्रबन्ध लिखा था। इस में उन्होंने अन्य देशों से भारत के व्यापारिक सम्बन्धों पर विचार किया है। इन व्यापारिक सम्बन्धों की विवेचना के दौरान भारत के आर्थिक विकास की रूपरेखा भी बन गई है। यह शोध प्रबन्ध रचनावली के 12वें खण्ड में प्रकाशित है।

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पूरा नाम बाबासाहेब डॉ. भीमराव आम्बेडकर
अन्य नाम बाबासाहेब
जन्म 14 अप्रैल, 1891
जन्म भूमि मऊ, मध्य प्रदेश
मृत्यु 6 दिसंबर, 1956
मृत्यु स्थान दिल्ली
मृत्यु कारण स्वास्थ्य ख़राब
अविभावक रामजी मालोजी सकपाल, भीमाबाई मुरबादकर
पति/पत्नी रमाबाई
नागरिकता भारतीय
पार्टी स्वतंत्र लेबर पार्टी
पद अध्यक्ष- स्वतंत्र लेबर पार्टी
शिक्षा एम.ए. (अर्थशास्त्र), पी एच. डी., एम. एस. सी., बार-एट-लॉ
विद्यालय एलिफिन्सटन कॉलेज, कोलंबिया विश्वविद्यालय, लंदन स्कूल ऑफ इकोनोमिक्स
भाषा हिंदी, अंग्रेज़ी
पुरस्कार-उपाधि भारत रत्न
कार्यक्षेत्र बड़ौदा राज्य के मिलिटरी सेक्रेटरी, अर्थशास्त्र के प्रोफेसर, प्रधानाचार्य
रचनाएँ 'डॉ. बाबा साहब आम्बेडकर राइटिंग्स एंड स्पीचेज' (अंग्रेज़ी), बाबा साहब डॉक्टर आम्बेडकर सम्पूर्ण वाङ्मय (हिन्दी), जाति के विनाश
अन्य जानकारी आम्बेडकर विधि विशेषज्ञ, अर्थशास्त्री, इतिहास विवेचक और धर्म और दर्शन के विद्वान थे।
डॉ. भीमराव रामजी आम्बेडकर (अंग्रेज़ी: Bhimrao Ramji Ambedkar, जन्म: 14 अप्रैल, 1891 - मृत्यु: 6 दिसंबर, 1956) एक बहुजन राजनीतिक नेता, और एक बौद्ध पुनरुत्थानवादी भी थे। उन्हें बाबासाहेब के नाम से भी जाना जाता है। आम्बेडकर ने अपना सारा जीवन हिन्दू धर्म की चतुवर्ण प्रणाली, और भारतीय समाज में सर्वत्र व्याप्त जाति व्यवस्था के विरुद्ध संघर्ष में बिता दिया। हिन्दू धर्म में मानव समाज को चार वर्णों में वर्गीकृत किया है। उन्हें बौद्ध महाशक्तियों के दलित आंदोलन को प्रारंभ करने का श्रेय भी जाता है। आम्बेडकर को भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया है जो भारत का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार है। अपनी महत्त्वपूर्ण उपलब्धियों तथा देश की अमूल्य सेवा के फलस्वरूप डॉ. अम्बेडकर को 'आधुनिक युग का मनु' कहकर सम्मानित किया गया।
जीवन परिचय

डॉ. भीमराव रामजी आम्बेडकर का जन्म 14 अप्रैल 1891 में हुआ था। वे रामजी मालोजी सकपाल और भीमाबाई मुरबादकर की 14वीं व अंतिम संतान थे। उनका परिवार मराठी था और वो अंबावडे नगर जो आधुनिक महाराष्ट्र के रत्नागिरी ज़िले में है, से संबंधित था। अनेक समकालीन राजनीतिज्ञों को देखते हुए उनकी जीवन-अवधि कुछ कम थी। वे महार जाति के थे जो अछूत कहे जाते थे। किन्तु इस अवधी में भी उन्होंने अध्ययन, लेखन, भाषण और संगठन के बहुत से काम किए जिनका प्रभाव उस समय की और बाद की राजनीति पर है। भीमराव आम्बेडकर का जन्म निम्न वर्ण की महार जाति में हुआ था। उस समय अंग्रेज़ निम्न वर्ण की जातियों से नौजवानों को फ़ौज में भर्ती कर रहे थे। आम्बेडकर के पूर्वज लंबे समय तक ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना में कार्यरत थे और भीमराव के पिता रामजी आम्बेडकर ब्रिटिश फ़ौज में सूबेदार थे और कुछ समय तक एक फ़ौजी स्कूल में अध्यापक भी रहे। उनके पिता ने मराठी और अंग्रेज़ी में औपचारिक शिक्षा की डिग्री प्राप्त की थी। वह शिक्षा का महत्त्व समझते थे और भीमराव की पढ़ाई लिखाई पर उन्होंने बहुत ध्यान दिया।
शिक्षा
अछूत समझी जाने वाली जाति में जन्म लेने के कारण अपने स्कूली जीवन में आम्बेडकर को अनेक अपमानजनक स्थितियों का सामना करना पड़ा। इन सब स्थितियों का धैर्य और वीरता से सामना करते हुए उन्होंने स्कूली शिक्षा समाप्त की। फिर कॉलेज की पढ़ाई शुरू हुई। इस बीच पिता का हाथ तंग हुआ। खर्चे की कमी हुई। एक मित्र उन्हें बड़ौदा के शासक गायकवाड़ के यहाँ ले गए। गायकवाड़ ने उनके लिए स्कॉलरशिप की व्यवस्था कर दी और आम्बेडकर ने अपनी कॉलेज की शिक्षा पूरी की। 1907 में मैट्रिकुलेशन पास करने के बाद बड़ौदा महाराज की आर्थिक सहायता से वे एलिफिन्सटन कॉलेज से 1912 में ग्रेजुएट हुए।
1913 और 15 के बीच जब आम्बेडकर कोलंबिया विश्वविद्यालय में अध्ययन कर रहे थे, तब एम.ए. की परीक्षा के एक प्रश्न पत्र के बदले उन्होंने प्राचीन भारतीय व्यापार पर एक शोध प्रबन्ध लिखा था। इस में उन्होंने अन्य देशों से भारत के व्यापारिक सम्बन्धों पर विचार किया है। इन व्यापारिक सम्बन्धों की विवेचना के दौरान भारत के आर्थिक विकास की रूपरेखा भी बन गई है। यह शोध प्रबन्ध रचनावली के 12वें खण्ड में प्रकाशित है।

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पूरा नाम चक्रवर्ती राजगोपालाचारी
अन्य नाम राजाजी
जन्म 10 दिसंबर, 1878
जन्म भूमि मद्रास
मृत्यु 28 दिसम्बर, 1972
अविभावक श्री नलिन चक्रवर्ती
नागरिकता भारतीय
प्रसिद्धि स्वतन्त्रता सेनानी, क्रान्तिकारी, पत्रकार, समाजसुधारक, शिक्षा विशेषज्ञ
पार्टी कांग्रेस
पद भूतपूर्व उद्योग मंत्री, मद्रास के मुख्यमंत्री, बंगाल के राज्यपाल
शिक्षा वकालत
विद्यालय प्रेसीडेंसी कॉलेज मद्रास
भाषा हिन्दी, तमिल और अंग्रेज़ी
पुरस्कार-उपाधि भारत रत्न
अद्यतन‎ 11:53, 11 मार्च 2011 (IST)
चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (अंग्रेज़ी: Chakravarti Rajagopalachari, जन्म: 10 दिसंबर, 1878 - मृत्यु: 28 दिसम्बर, 1972) भारतीय राजनीति के शिखर पुरुष थे जो राजाजी के नाम से भी जाने जाते हैं। राजगोपालाचारी वकील, लेखक, राजनीतिज्ञ और दार्शनिक थे। वे स्वतन्त्र भारत के द्वितीय गवर्नर जनरल और प्रथम भारतीय गवर्नर जनरल थे। अपने अद्भुत और प्रभावशाली व्यक्तित्व के कारण 'राजाजी' के नाम से प्रसिद्ध महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, गांधीवादी राजनीतिज्ञ चक्रवर्ती राजगोपालाचारी को आधुनिक भारत के इतिहास का 'चाणक्य' माना जाता है। राजगोपालाचारी जी की बुद्धि चातुर्य और दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गांधी और सरदार पटेल जैसे अनेक उच्चकोटि के कांग्रेसी नेता भी उनकी प्रशंसा करते नहीं अघाते थे।
जीवन परिचय

चक्रवर्ती राजगोपालाचारी का जन्म 10 दिसंबर, 1878 को तमिलनाडु (मद्रास) के सेलम ज़िले के होसूर के पास 'धोरापल्ली' नामक गांव में हुआ था। एक वैष्णव ब्राह्मण परिवार में जन्मे चक्रवर्ती जी के पिता का नाम श्री नलिन चक्रवर्ती था, जो सेलम के न्यायालय में न्यायधीश के पद पर कार्यरत थे। राजगोपालाचारी जी की प्रारम्भिक शिक्षा गांव के ही एक स्कूल से प्राप्त करने के बाद उन्होंने बैंगलोर के सैंट्रल कॉलेज से हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। इसके बाद मद्रास के प्रेसीडेंसी कॉलेज से बी.ए. और वकालत की परीक्षा उत्तीर्ण की। वकालत की डिग्री पाने के पश्चात वे सेलम में ही वकालत करने लगे। अपनी योग्यता और प्रतिभा के बल पर उनकी गणना वहां के प्रमुख वकीलों में की जाने चक्रवर्ती पढ़ने लिखने में तो तेज थे ही, देशभक्ति और समाज सेवा की भावना भी उनमें स्वाभाविक रूप से विद्यमान थी। जिन दिनों वे वकालत कर रहे थे, उन्हीं दिनों वे स्वामी विवेकानंद जी के विचारों से अत्यंत प्रभावित हुए और वकालत के साथ साथ समाज सुधार के कार्यों में भी सक्रिय रूप से रुचि लेने लगे। उनके समाज सेवी कार्यों से प्रभावित होकर जनता द्वारा उन्हें सेलम की म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन का अध्यक्ष चुन लिया गया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने अनेक नागरिक समस्याओं का तो समाधान किया ही, साथ ही तत्कालीन समाज में व्याप्त ऐसी सामाजिक बुराइयों का भी जमकर विरोध किया जो उन्हीं के जैसे हिम्मती व्यक्ति के बस की बात थी। सेलम में पहले सहकारी बैंक की स्थापना का श्रेय भी उन्हें ही जाता है।

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पूरा नाम चक्रवर्ती राजगोपालाचारी
अन्य नाम राजाजी
जन्म 10 दिसंबर, 1878
जन्म भूमि मद्रास
मृत्यु 28 दिसम्बर, 1972
अविभावक श्री नलिन चक्रवर्ती
नागरिकता भारतीय
प्रसिद्धि स्वतन्त्रता सेनानी, क्रान्तिकारी, पत्रकार, समाजसुधारक, शिक्षा विशेषज्ञ
पार्टी कांग्रेस
पद भूतपूर्व उद्योग मंत्री, मद्रास के मुख्यमंत्री, बंगाल के राज्यपाल
शिक्षा वकालत
विद्यालय प्रेसीडेंसी कॉलेज मद्रास
भाषा हिन्दी, तमिल और अंग्रेज़ी
पुरस्कार-उपाधि भारत रत्न
अद्यतन‎ 11:53, 11 मार्च 2011 (IST)
चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (अंग्रेज़ी: Chakravarti Rajagopalachari, जन्म: 10 दिसंबर, 1878 - मृत्यु: 28 दिसम्बर, 1972) भारतीय राजनीति के शिखर पुरुष थे जो राजाजी के नाम से भी जाने जाते हैं। राजगोपालाचारी वकील, लेखक, राजनीतिज्ञ और दार्शनिक थे। वे स्वतन्त्र भारत के द्वितीय गवर्नर जनरल और प्रथम भारतीय गवर्नर जनरल थे। अपने अद्भुत और प्रभावशाली व्यक्तित्व के कारण 'राजाजी' के नाम से प्रसिद्ध महान स्वतंत्रता सेनानी, समाज सुधारक, गांधीवादी राजनीतिज्ञ चक्रवर्ती राजगोपालाचारी को आधुनिक भारत के इतिहास का 'चाणक्य' माना जाता है। राजगोपालाचारी जी की बुद्धि चातुर्य और दृढ़ इच्छाशक्ति के कारण जवाहरलाल नेहरू, महात्मा गांधी और सरदार पटेल जैसे अनेक उच्चकोटि के कांग्रेसी नेता भी उनकी प्रशंसा करते नहीं अघाते थे।
जीवन परिचय

चक्रवर्ती राजगोपालाचारी का जन्म 10 दिसंबर, 1878 को तमिलनाडु (मद्रास) के सेलम ज़िले के होसूर के पास 'धोरापल्ली' नामक गांव में हुआ था। एक वैष्णव ब्राह्मण परिवार में जन्मे चक्रवर्ती जी के पिता का नाम श्री नलिन चक्रवर्ती था, जो सेलम के न्यायालय में न्यायधीश के पद पर कार्यरत थे। राजगोपालाचारी जी की प्रारम्भिक शिक्षा गांव के ही एक स्कूल से प्राप्त करने के बाद उन्होंने बैंगलोर के सैंट्रल कॉलेज से हाई स्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। इसके बाद मद्रास के प्रेसीडेंसी कॉलेज से बी.ए. और वकालत की परीक्षा उत्तीर्ण की। वकालत की डिग्री पाने के पश्चात वे सेलम में ही वकालत करने लगे। अपनी योग्यता और प्रतिभा के बल पर उनकी गणना वहां के प्रमुख वकीलों में की जाने चक्रवर्ती पढ़ने लिखने में तो तेज थे ही, देशभक्ति और समाज सेवा की भावना भी उनमें स्वाभाविक रूप से विद्यमान थी। जिन दिनों वे वकालत कर रहे थे, उन्हीं दिनों वे स्वामी विवेकानंद जी के विचारों से अत्यंत प्रभावित हुए और वकालत के साथ साथ समाज सुधार के कार्यों में भी सक्रिय रूप से रुचि लेने लगे। उनके समाज सेवी कार्यों से प्रभावित होकर जनता द्वारा उन्हें सेलम की म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन का अध्यक्ष चुन लिया गया। इस पद पर रहते हुए उन्होंने अनेक नागरिक समस्याओं का तो समाधान किया ही, साथ ही तत्कालीन समाज में व्याप्त ऐसी सामाजिक बुराइयों का भी जमकर विरोध किया जो उन्हीं के जैसे हिम्मती व्यक्ति के बस की बात थी। सेलम में पहले सहकारी बैंक की स्थापना का श्रेय भी उन्हें ही जाता है।

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पूरा नाम चाणक्य
अन्य नाम कौटिल्य, विष्णुगुप्त
जन्म अनुमानत: ईसा पूर्व 370
जन्म भूमि पंजाब
मृत्यु अनुमानत: ईसा पूर्व 283
मृत्यु स्थान पाटलिपुत्र
पति/पत्नी 'बृहत्कथाकोश' के अनुसार चाणक्य की पत्नी का नाम 'यशोमती' था।
कर्म भूमि भारत
कर्म-क्षेत्र शिक्षक
मुख्य रचनाएँ अर्थशास्त्र
प्रसिद्धि राजनीतिज्ञ और चंद्रगुप्त मौर्य के महामंत्री
विशेष योगदान चाणक्य की सहायता और उनके कुशल निर्देशन से ही चंद्रगुप्त मौर्य ने भारत में मौर्य वंश की स्थापना की थी।
नागरिकता भारतीय
संबंधित लेख चंद्रगुप्त मौर्य, धननंद, तक्षशिला
मुख्य प्रसंग 'मुद्राराक्षस' में कहा गया है कि राजा नन्द ने भरे दरबार में चाणक्य को उसके उस पद से हटा दिया, जो उसे दरबार में दिया गया था। इस पर चाणक्य ने शपथ ली कि "वह उसके परिवार तथा वंश को निर्मूल करके नन्द से बदला लेगा।"
अन्य जानकारी चाणक्य ने 'अर्थशास्त्र' नामक एक ग्रन्थ की रचना की, जो तत्कालीन राजनीति, अर्थनीति, इतिहास, आचरण शास्त्र, धर्म आदि पर भली-भाँति प्रकाश डालता है। 'अर्थशास्त्र' मौर्य काल के समाज का दर्पण है, जिसमें समाज के स्वरूप का सर्वागं देखा जा सकता है।
कौटिल्य अथवा 'चाणक्य' अथवा 'विष्णुगुप्त' (जन्म- अनुमानत: ईसा पूर्व 370, पंजाब; मृत्यु- अनुमानत: ईसा पूर्व 283, पाटलिपुत्र) सम्पूर्ण विश्व में एक महान राजनीतिज्ञ और मौर्य सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के महामंत्री के रूप में प्रसिद्ध हैं। इनका व्यक्तिवाचक नाम 'विष्णुगुप्त', स्थानीय नाम 'चाणक्य' (चाणक्यवासी) और गोत्र नाम 'कौटिल्य' (कुटिल से) था। ये चन्द्रगुप्त मौर्य के प्रधानमन्त्री थे। चाणक्य का नाम संभवत उनके गोत्र का नाम 'चणक', पिता के नाम 'चणक' अथवा स्थान का नाम 'चणक' का परिवर्तित रूप रहा होगा। चाणक्य नाम से प्रसिद्ध एक नीतिग्रन्थ 'चाणक्यनीति' भी प्रचलित है। तक्षशिला की प्रसिद्धि महान अर्थशास्त्री चाणक्य के कारण भी है, जो यहाँ प्राध्यापक था और जिसने चन्द्रगुप्त के साथ मिलकर मौर्य साम्राज्य की नींव डाली। 'मुद्राराक्षस' में कहा गया है कि राजा नन्द ने भरे दरबार में चाणक्य को उसके उस पद से हटा दिया, जो उसे दरबार में दिया गया था। इस पर चाणक्य ने शपथ ली कि "वह उसके परिवार तथा वंश को निर्मूल करके नन्द से बदला लेगा।" 'बृहत्कथाकोश' के अनुसार चाणक्य की पत्नी का नाम 'यशोमती' था।[1]
जन्म तथा शिक्षा

माना जाता है कि चाणक्य ने ईसा से 370 वर्ष पूर्व ऋषि चणक के पुत्र के रूप में जन्म लिया था। वही उनके आरंभिक काल के गुरु थे। कुछ इतिहासकार मानते हैं कि चणक केवल उनके गुरु थे। चणक के ही शिष्य होने के नाते उनका नाम 'चाणक्य' पड़ा। उस समय का कोई प्रामाणिक इतिहास उपलब्ध नहीं है। इतिहासकारों ने प्राप्त सूचनाओं के आधार पर अपनी-अपनी धारणाएं बनाई। परंतु यह सर्वसम्मत है कि चाणक्य की आरंभिक शिक्षा गुरु चणक द्वारा ही दी गई। संस्कृत ज्ञान तथा वेद-पुराण आदि धार्मिक ग्रंथों का अध्ययन चाणक्य ने उन्हीं के निर्देशन में किया। चाणक्य मेधावी छात्र थे। गुरु उनकी शिक्षा ग्रहण करने की तीव्र क्षमता से अत्यंत प्रसन्न थे। तत्कालीन समय में सभी सूचनाएं व विधाएं धर्मग्रंथों के माध्यम से ही प्राप्त होती थीं। अत: धार्मिक पुस्तकों का अध्ययन शिक्षा प्राप्त का एकमात्र साधन था। चाणक्य ने किशोरावस्था में ही उन ग्रंथों का सारा ज्ञान ग्रहण कर लिया था।[2]
अर्थशास्त्र

इन्होंने 'अर्थशास्त्र' नामक एक ग्रन्थ की रचना की, जो तत्कालीन राजनीति, अर्थनीति, इतिहास, आचरण शास्त्र, धर्म आदि पर भली भाँति प्रकाश डालता है। 'अर्थशास्त्र' मौर्य काल के समाज का दर्पण है, जिसमें समाज के स्वरूप को सर्वागं देखा जा सकता है। अर्थशास्त्र से धार्मिक जीवन पर भी काफ़ी प्रकाश पड़ता है। उस समय बहुत से देवताओं तथा देवियों की पूजा होती थी। न केवल बड़े देवता-देवी अपितु यक्ष, गन्धर्व, पर्वत, नदी, वृक्ष, अग्नि, पक्षी, सर्प, गाय आदि की भी पूजा होती थी। महामारी, पशुरोग, भूत, अग्नि, बाढ़, सूखा, अकाल आदि से बचने के लिए भी बहुत से धार्मिक कृत्य किये जाते थे। अनेक उत्सव, जादू टोने आदि का भी प्रचार था। अर्थशास्त्र राजनीति का उत्कृट ग्रन्थ है, जिसने परवर्ती राजधर्म को प्रभावित किया। चाणक्य ने अर्थशास्त्र में वार्ता (अर्थशास्त्र) तथा दण्डनीति (राज्यशासन) के साथ आन्वीक्षिकी (तर्कशास्त्र) तथा त्रयी (वैदिक ग्रन्थों) पर भी काफ़ी बल दिया है। अर्थशास्त्र के अनुसार यह राज्य का धर्म है कि वह देखे कि प्रजा वर्णाश्रम धर्म का 'उचित पालन करती है कि नहीं।[3]

Gk


पूरा नाम सिकंदर महान / Alexander
अन्य नाम अलक्ष्येन्द्र, एलेक्ज़ेंडर तृतीय, एलेक्ज़ेंडर मेसेडोनियन
जन्म 20 जुलाई, 356 ई. पू.
जन्म भूमि पेला, मैसेडोन, यूनान
मृत्यु तिथि 10 या 11 जून, 323 ई. पू. (उम्र 33 वर्ष)
मृत्यु स्थान बेबीलोन
पिता/माता फिलिप द्वितीय, ओलंपियाज़
पति/पत्नी रुखसाना, बैक्ट्रिया, स्ट्रैटेयरा द्वितीय
संतान सिकंदर चतुर्थ
उपाधि किंग
राज्य सीमा यूनान, फ़ारस और पंजाब
शासन काल 336 – 323 ई. पू.
शा. अवधि 13 वर्ष
पूर्वाधिकारी फिलिप द्वितीय
सिकन्दर अथवा अलक्ष्येन्द्र, मेसेडोनिया का ग्रीक प्रशासक था। वह एलेक्ज़ेंडर तृतीय, Alexander the Great तथा एलेक्ज़ेंडर मेसेडोनियन के नाम से भी जाना जाता है। इतिहास में सिकन्दर सबसे कुशल और यशस्वी सेनापति माना गया है। अपनी मृत्यु तक सिकन्दर उस तमाम भूमि को जीत चुका था, जिसकी जानकारी प्राचीन यवन (ग्रीक) लोगों को थी। इसलिए उसे विश्वविजेता भी कहा जाता है। सिकन्दर के पिता का नाम फ़िलिप था।
ऐतिहासिक उल्लेख

सिकन्दर को सबसे पहले एक गणराज्य के प्रधान के विरोध का सामना करना पड़ा, जिसे यूनानी ऐस्टीज़ कहते हैं, संस्कृत में जिसका नाम हस्तिन है; वह उस जाति का प्रधान था जिसका भारतीय नाम हास्तिनायन था [1]। यूनानी में इसके लिए अस्टाकेनोई या अस्टानेनोई-जैसे शब्दों का प्रयोग किया गया है, और उसकी राजधानी प्यूकेलाओटिस अर्थात् पुष्कलावती लिखी गई है। इस वीर सरदार ने अपने नगरकोट पर यूनानियों की घेरेबंदी का पूरे तीस दिन तक मुकाबला किया और अंत में लड़ता हुआ मारा गया। इसी प्रकार आश्वायन तथा आश्वकायन भी आखिरी दम तक लड़े, जैसा कि इस बात से पता चलता है कि उनके कम से कम 40,000 सैनिक बंदी बना लिए गए। उनकी आर्थिक समृद्धि का भी अनुमान इस बात से लगाया जा सकता है कि इस लड़ाई में 2,30,000 बैल सिकन्दर के हाथ लगे।[2]
आश्वकायनों ने 30,000 घुड़सवार 38,000 पैदल और 30 हाथियों की सेना लेकर, जिनकी सहायता के लिए मैदानों के रहने वाले 7,000 वेतनभोगी सिपाही और थे, सिकन्दर से मोर्चा लिया। यह पूरी आश्वकायनों की क़िलेबंद राजधानी मस्सग[3] में अपनी वीरांगना रानी क्लियोफ़िस[4] के नेतृत्व में आश्वकायनों ने "अंत तक अपने देश की रक्षा करने का दृढ़ संकल्प किया।" रानी के साथ ही वहाँ की स्त्रियों ने भी प्रतिरक्षा में भाग लिया। वेतनभोगी सैनिक के रूप में बड़े निरुत्साह होकर लड़े, परन्तु बाद में उन्हें जोश आ गया और उन्होंने "अपमान के जीवन की अपेक्षा गौरव के मर जाना" ही बेहतर समझा।[5] उनके इस उत्साह को देखकर अभिसार नामक निकटवर्ती पर्वतीय देश में भी उत्साह जाग्रत हुआ और वहाँ के लोग भी प्रतिरक्षा के लिए डट गए। उस प्रदेश के स्वतंत्र नगरों ने भी, जैसे आओर्नोस, बज़ीरा, ओरा अथवा डायर्टा आदि ने, प्रतिशोध का यही मार्ग अपनाया और उनमें प्रत्येक ने बहुत लम्बी घेरेबंदी के बाद ही हथियार डाले।[2]

बुधवार, 6 मई 2015

अशोक


पूरा नाम राजा[1] प्रियदर्शी देवताओं का प्रिय अशोक मौर्य
अन्य नाम 'देवानाम्प्रिय' एवं 'प्रियदर्शी'[2]
जन्म 304 ईसा पूर्व (संभावित)
जन्म भूमि पाटलिपुत्र (पटना)
मृत्यु तिथि 232 ईसा पूर्व
मृत्यु स्थान पाटलिपुत्र, पटना
पिता/माता बिन्दुसार, सुभद्रांगी (उत्तरी परम्परा), रानी धर्मा (दक्षिणी परम्परा)
पति/पत्नी (1) देवी (वेदिस-महादेवी शाक्यकुमारी), (2) कारुवाकी (द्वितीय देवी तीवलमाता), (3) असंधिमित्रा- अग्रमहिषी, (4) पद्मावती, (5) तिष्यरक्षिता[3]
संतान देवी से- पुत्र महेन्द्र, पुत्री संघमित्रा और पुत्री चारुमती, कारुवाकी से- पुत्र तीवर, पद्मावती से- पुत्र कुणाल (धर्मविवर्धन) और भी कई पुत्रों का उल्लेख है।
उपाधि राजा[1], 'देवानाम्प्रिय' एवं 'प्रियदर्शी'
राज्य सीमा सम्पूर्ण भारत
शासन काल ईसापूर्व 274[3] - 232
शा. अवधि 42 वर्ष लगभग
राज्याभिषेक 272[4] और 270[3] ईसा पूर्व के मध्य
धार्मिक मान्यता हिन्दू धर्म, बौद्ध धर्म
प्रसिद्धि अशोक महान, साम्राज्य विस्तारक, बौद्ध धर्म प्रचारक
युद्ध सम्राट बनने के बाद एक ही युद्ध लड़ा 'कलिंग-युद्ध' (262-260 ई.पू. के बीच)
निर्माण भवन, स्तूप, मठ और स्तंभ
सुधार-परिवर्तन शिलालेखों द्वारा जनता में हितकारी आदेशों का प्रचार
राजधानी पाटलिपुत्र (पटना)
पूर्वाधिकारी बिन्दुसार (पिता)
वंश मौर्य
संबंधित लेख अशोक के शिलालेख, मौर्य काल आदि
अशोक अथवा 'असोक' (काल ईसा पूर्व 269 - 232) प्राचीन भारत में मौर्य राजवंश का राजा था। अशोक का देवानाम्प्रिय एवं प्रियदर्शी आदि नामों से भी उल्लेख किया जाता है। उसके समय मौर्य राज्य उत्तर में हिन्दुकुश की श्रेणियों से लेकर दक्षिण में गोदावरी नदी के दक्षिण तथा मैसूर, कर्नाटक तक तथा पूर्व में बंगाल से पश्चिम में अफ़ग़ानिस्तान तक पहुँच गया था। यह उस समय तक का सबसे बड़ा भारतीय साम्राज्य था। सम्राट अशोक को अपने विस्तृत साम्राज्य के बेहतर कुशल प्रशासन तथा बौद्ध धर्म के प्रचार के लिए जाना जाता है। जीवन के उत्तरार्ध में अशोक गौतम बुद्ध का भक्त हो गया और उन्हीं[5] की स्मृति में उसने एक स्तम्भ खड़ा कर दिया जो आज भी नेपाल में उनके जन्मस्थल - लुम्बिनी में 'मायादेवी मन्दिर' के पास अशोक स्‍तम्‍भ के रूप में देखा जा सकता है। उसने बौद्ध धर्म का प्रचार भारत के अलावा श्रीलंका, अफ़ग़ानिस्तान, पश्चिम एशिया, मिस्र तथा यूनान में भी करवाया। अशोक के अभिलेखों में प्रजा के प्रति कल्याणकारी दृष्टिकोण की अभिव्यक्ति की गई है।
जीवन परिचय

 मुख्य लेख : अशोक का जीवन परिचय
जन्म
अशोक प्राचीन भारत के मौर्य सम्राट बिंदुसार का पुत्र था। जिसका जन्म लगभग 304 ई. पूर्व में माना जाता है। लंका की परम्परा में [6] बिंदुसार की सोलह पटरानियों और 101 पुत्रों का उल्लेख है। पुत्रों में केवल तीन के नामोल्लेख हैं, वे हैं - सुसीम [7] जो सबसे बड़ा था, अशोक और तिष्य। तिष्य अशोक का सहोदर भाई और सबसे छोटा था।[8]भाइयों के साथ गृह-युद्ध के बाद 272 ई. पूर्व अशोक को राजगद्दी मिली और 232 ई. पूर्व तक उसने शासन किया।
 इन्हें भी देखें: अशोक का परिवार, बिंदुसार एवं चंद्रगुप्त मौर्य
देवानाम्प्रिय प्रियदर्शी के अर्थ
'देवानाम्प्रिय प्रियदर्शी' इस वाक्यांश में बी.ए. स्मिथ के मतानुसार 'देवानाम्प्रिय' आदरसूचक पद है और इसी अर्थ में हमने भी इसको लिया है किंतु देवानाम्प्रिय शब्द (देव-प्रिय नहीं) पाणिनी के एक सूत्र[9] के अनुसार अनादर का सूचक है। कात्यायन[10] इसे अपवाद में रखा है। पतंजलि[11] और यहाँ तक कि काशिका (650 ई.) भी इसे अपवाद ही मानते हैं। पर इन सबके उत्तरकालीन वैयाकरण भट्टोजिदीक्षित इसे अपवाद में नहीं रखते। वे इसका अनादरवाची अर्थ 'मूर्ख' ही करते हैं। उनके मत से 'देवानाम्प्रिय ब्रह्मज्ञान से रहित उस पुरुष को कहते हैं जो यज्ञ और पूजा से भगवान को प्रसन्न करने का यत्न करता है। जैसे- गाय दूध देकर मालिक को।[12] इस प्रकार एक उपाधि जो नंदों, मौर्यों और शुंगों के युग में आदरवाची थी। उस महान राजा के प्रति ब्राह्मणों के दुराग्रह के कारण अनादर सूचक बन गई।
शासन साम्राज्य

 मुख्य लेख : अशोक का शासन
अशोक सीरिया के राजा 'एण्टियोकस द्वितीय'[13] और कुछ अन्य यवन[14] राजाओं का समसामयिक था, जिनका उल्लेख 'शिलालेख संख्या 8' में है। इससे विदित होता है कि अशोक ने ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी के उत्तरार्ध में राज्य किया, किंतु उसके राज्याभिषेक की सही तारीख़ का पता नहीं चलता है। अशोक ने 40 वर्ष राज्य किया। इसलिए राज्याभिषेक के समय वह युवक ही रहा होगा। अशोक के राज्यकाल के प्रारम्भिक 12 वर्षों का कोई सुनिश्चित विवरण उपलब्ध नहीं है। [15] अपने राज्याभिषेक के नवें वर्ष तक अशोक ने मौर्य साम्राज्य की परम्परागत नीति का ही अनुसरण किया। अशोक ने देश के अन्दर साम्राज्य का विस्तार किया

GK


कोहिनूर हीरा (अंग्रेज़ी:Koh-i-noor Diamond) दुनिया के सभी हीरों का राजा है, जिसे गोलकुंडा (भारत) की एक खान से निकाला गया था। कोहिनूर को फ़ारसी में "कूह-ए-नूर" कहा जाता है, जिसका अर्थ है- "कुदरत की विशाल आभा या रोशनी का पर्वत"। यह हीरा 105 कैरेट (लगभग 21.600 ग्राम) का है। यह अभी तक विश्व का सबसे बड़ा ज्ञात ऐतिहासिक हीरा रह चुका है। कई मुग़ल बादशाहों और फ़ारसी शासकों से होता हुआ, यह हीरा अनतत: ब्रिटिश शासन के अधिकार में चला गया और अब उनके ख़ज़ाने में शामिल है। भारत में अंग्रेज़ शासन के दौरान इसे ब्रिटिश प्रधानमंत्री बेंजामिन डिजराएली ने महारानी विक्टोरिया को तब भेंट किया, जब सन 1877 में उन्हें भारत की भी सम्राज्ञी घोषित किया गया था।
इतिहास

कोहिनूर का उद्गम व आरम्भिक इतिहास स्पष्ट नहीं है। इसकी कहानी भी परी कथाओं से कम रोमांचक नहीं है। इसके खनन से जुड़ी दक्षिण भारत में हीरों की कई कहानियाँ रहीं हैं, परंतु कौन-सी कोहिनूर से सम्बन्धित है, यह कहना कठिन है। 14वीं शताब्दी से पूर्व इस हीरे का इतिहास ठीक ज्ञात नहीं है।


बाबर
बाबर का अधिकार
दिल्ली सल्तनत में ख़िलजी वंश का अंत 1320 में होने के बाद ग़यासुद्दीन तुग़लक़ ने गद्दी संभाली। उसने अपने पुत्र उलूग ख़ाँ को 1323 में काकतीय वंश के राजा प्रतापरुद्रदेव को युद्ध में हराने भेजा था। इस हमले को कड़ी टक्कर मिली, परन्तु उलूग ख़ाँ एक बड़ी सेना के साथ फिर युद्ध करने लौटा। इसके लिए अनपेक्षित राजा प्रतापरुद्रदेव वारंगल के युद्ध में हार गया। तब वारंगल की लूट-पाट, तोड़-फोड़ व हत्या-कांड महीनों चला। मुस्लिमों के हाथ सोना-चाँदी व हाथी-दांत की बड़ी मात्रा लगी, जो कि हाथियों, घोड़ों व ऊंटों पर लादकर दिल्ली ले जाई गई। कोहिनूर हीरा भी इस लूट का भाग था। यहीं से यह हीरा 'दिल्ली सल्तनत' के उत्तराधिकारियों के हाथों से मुग़ल सम्राट बाबर के हाथ 1526 में लगा।
बाबरनामा में उल्लेख
इस हीरे की प्रथम दृष्टया पक्की टिप्पणी यहीं सन 1526 से मिलती है। बाबर ने अपने संस्मरण में आगरा की विजय में एक बृहत्‌ उत्तम हीरा प्राप्त करने का उल्लेख किया है। संभवत: वह कोहिनूर ही था, क्योंकि उस हीरे का भार आठ मिस्कल (320 रत्ती) बताया गया है। तराशे जाने के पूर्व कोहिनूर का भार इतना ही था। बाबर ने अपने 'बाबरनामा' में लिखा है कि यह हीरा सन 1294 में मालवा के एक राजा का था।[1] बाबर ने इसका मूल्य यह आंका कि यह हीरा पूरे संसार का दो दिनों तक पेट भर सकता है। 'बाबरनामा' में दिया है कि किस प्रकार मालवा के राजा को जबर्दस्ती यह विरासत अलाउद्दीन ख़िलज़ी को देने पर मजबूर किया गया। उसके बाद यह 'दिल्ली सल्तनत' के उत्तराधिकारियों द्वारा आगे बढ़ाया गया, और अन्ततः 1526 में बाबर की जीत पर उसे प्राप्त हुआ। हालांकि 'बाबरनामा' 1526 से 1530 में लिखा गया था, परन्तु इसके स्रोत ज्ञात नहीं हैं। उसने इस हीरे को सर्वदा इसके वर्तमान नाम से नहीं पुकारा है। बल्कि एक विवाद के बाद यह निष्कर्ष निकला कि बाबर का हीरा ही बाद में कोहिनूर कहलाया। बाबर एवं हुमायूँ, दोनों ने ही अपनी आत्मकथाओं में बाबर के हीरे के उद्गम के बारे में लिखा है। यह हीरा पहले ग्वालियर के कछवाहा शासकों के पास था, जिनसे यह तोमर राजाओं के पास पहुँचा।
औरगज़ेब के पास


कोहिनूर हीरा
अंतिम तोमर शासक विक्रमादित्य को सिकन्दर लोदी ने हराया और अपने अधीन किया। उसने उसे अपने साथ दिल्ली में ही बंदी बना कर रखा। लोदी की मुग़लों से हार के बाद, मुज़लों ने उसकी संपत्ति लूटी, किन्तु हुमायूँ ने न केवल मध्यस्थता करके उसकी संपत्ति वापस दिलवा दी, बल्कि उसे छुड़वा कर मेवाड़, चित्तौड़ में पनाह लेने दी। हुमायूँ की इस भलाई के बदले विक्रमादित्य ने अपना एक बहुमूल्य हीरा, जो शायद कोहिनूर ही था, हुमायूँ को साभार दे दिया। परन्तु हुमायूँ का जीवन अति दुर्भाग्यपूर्ण रहा। वह शेरशाह सूरी से हार गया। सूरी भी एक तोप के गोले से जलकर मर गया। उसका पुत्र व उत्तराधिकारी जलाल ख़ान अपने साले द्वारा हत्या को प्राप्त हुआ। उस साले को भी उसके एक मंत्री ने तख्तापलट कर हटा दिया। वह मंत्री भी एक युद्ध को जीतते-जीतते आँख में चोट लग जाने के कारण हार गया और सल्तनत खो बैठा। हुमायूँ के पुत्र अकबर ने यह रत्न कभी अपने पास नहीं रखा, जो कि बाद में सीधे शाहजहाँ के ख़ज़ाने में ही पहुँचा। शाहजहाँ भी अपने बेटे औरंगज़ेब द्वारा तख्तापलट कर बंदी बनाया गया, जिसने अपने अन्य तीन भाइयों की हत्या भी की थी। निश्चित रूप से ज्ञात है कि कोहिनूर औरंगजेब के पास था और वह उसे बड़े यत्न से रखता था।
नादिरशाह का स्वामित्व

कोहिनूर की भिन्न कोणों से टैवर्नियर की अभिकल्पना के अनुसार, मुग़ल सम्राट शाहजहाँ ने कोहिनूर को अपने प्रसिद्ध 'मयूर सिंहासन' ('तख़्त-ए-ताउस') में जड़वायजड़वाया

GK


विश्व के पर्वत, पठार एवं मैदान – सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी
● स्थलमंडल के कुल क्षेत्रफल के कितने % भाग पर पर्वतों का विस्तार है— 26%
● पर्वत की गणना किस श्रेणी के स्थलों में की जाती है— द्वितीय श्रेणी
● विश्व की कितने % जनसंख्या पर्वतों पर निवास करती है— 1%
● ‘रेडियो सक्रियता’ का सिद्धांत किसने प्रतिपादित किया— जॉली ने
● रेडियो सक्रियता का सिद्धांत किससे संबंधित है— पर्वतों की उत्पत्ति से
● पर्वत निर्माणक भू-सन्नति सिद्धांत का प्रतिपादन किसने किया— कोबर ने
● विश्व के विशाल वलित पर्वतों की रचना कितने मिलियन वर्ष पूर्व हुई थी— 30
● नवीनतम् पर्वतमाला कौन-सी है— यूराल
● हिमालय पर्वत किसके अन्तर्गत आता है— नवीन वलित पर्वत
● हिमालय पर्वत की उत्पत्ति किस भू-सन्नति से हुई— टेथिस
● दक्षिणी आल्टस पर्वत श्रेणी कहाँ स्थित है— न्यूजीलैंड में
● कौन-सा पर्वत महाद्वीपीय जलविभाजनक के रूप में जाना जाता है— रॉकीज
● विश्व की सबसे लंबी पर्वतमाला कौन-सी है— एंडीज
● एंडीज पर्वतमाला की सबसे ऊँची चोटी कौन-सी है— एकांकागुआ
● विश्व की सर्वोच्च पर्वत चोटी माउंट एवरेस्ट किस देश में है— नेपाल में
● उत्तरी अमेरिका की सबसे ऊँची चोटी कौन-सी है— माउंट मैकिन्ले
● स्थलमंडल के कितने % भाग पर पठार पाये जाते है— 33%
● विश्व की कितनी जनसंख्या पठारों पर निवास करती है— 9%
● जो पठार चारों ओर से पर्वतमाला से घिरे होते हैं, क्या कहलाते हैं— अंतरापर्वतीय पठार
● विश्व का सबसे ऊँचा पठार कौन-सा है— तिब्बत का पठार
● पोटवार पठार किस देश में स्थित है— पाकिस्तान में
● लोयस पठार कहाँ है— चीन में
● तिब्बत का पठार कहाँ स्थित है— हिमालय पर्वत और क्यूनलून पर्वत के मध्य
● किस पठार को ‘दुनिया की छत’ कहा जाता है— पामीर का पठार
● किस पठार से टिन धातु का सर्वाधिक उत्खन्न किया जाता है— बोलीविया के पठार से
● स्थलमंडल के कुल क्षेत्रफल के कितने % भाग पर मैदान है— 41%
● विश्व में फसलों और खाद्य और वस्तुओं का कितने % भाग मैदानों में उगाया जाता है— 85%
● विश्व की कुल जनसंख्या का कितने % भाग मैदानों में निवास करता है— 90%
● ‘सभ्यता का पालना’ किसे कहा जाता है— पहाड़ को
● उत्तर-पश्चिमी चीन का मैदान किस प्रकार से बना है— रेत व धूल कणों के जमाव से
● सम्प्राय मैदान का निर्माण किसके द्वारा होता है— नदी
● पेडीप्लेन मैदान का निर्माण किसके द्वारा होता है— पवन
● ड्रेकेन्सबर्ग पर्वत कहाँ है— दक्षिणी अफ्रीका में
● मैदान की गणना किस श्रेणी के स्थलों में की जाती है— द्वितीय श्रेणी
● ब्लैक हिल नामक पहाड़ी किस देश में हैं— संयुक्त राज्य अमेरिका
● पिरनीज पर्वत किन दो देशों के मध्य स्थित हैं— फ्रांस और स्पेन
● विंध्य पठार कहाँ स्थित है— भारत में
● मैसौरी का पठार कहाँ स्थित है— अमेरिका में
● मेसेटा का पठार किस-किस के मध्य है— स्पेन व पुर्तगाल के मध्य
● कास्र्ट मैदानों में यत्र-तत्र स्थित अवशिष्ट टीलों को क्या कहा जाता है— हयूंस
● राँची का पट पठार क्या है— एक उत्थित पेनीप्लेन
● क्षेत्रफल की दृष्टि से विश्व का सबसे बड़ा पठार कौन-सा है— तिब्बत का पठार
● टेलीग्राफिक पठार कहाँ स्थित है— उत्तरी अटलांटिक महासागर में

GK


1. हाल ही में कौन–सा दक्षिण एशियाई देश विश्व बैंक की एजेंसी माइगा का 181 वाँ सदस्य बना? – भूटान
2. किस देश ने परमाणु संयंत्रों के बड़े नेटवर्क का विस्तार करने हेतु परमाणु बिजली विस्तार परियोजना शुरू की? – चीन
3. हाल ही में केंद्र सरकार ने पेंशनभोगियों को किस डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट की सुविधा प्रदान की है? – जीवन प्रमाण
4. निकाय चुनाव में अनिवार्य मतदान का प्रावधान करने वाला देश का प्रथम राज्य कौन–सा है? – गुजरात
5. प्लेट्स ग्लोबल 250 रैंकिंग में सबसे ऊँची रैंक पाने वाली भारतीय ऊर्जा कंपनी कौन–सी है? – ओएनजीसी
6. हाल ही में जापान की सॉफ्टबैंक कंपनी ने भारत में 10 बिलियन डॉलर के निवेश की घोषणा की है। सॉफ्टबैंक किस क्षेत्र से संबंधित कंपनी है? – दूरसंचार
7. हाल ही में फुटबाल खिलाड़ी लियोनल मेसी चैंपियंस लीग में सर्वाधिक गोल करने वाले खिलाड़ी बन गए हैं। उनका संबंध किस देश से है? – अर्जेंटीना
8. हाल ही में राष्ट्रमंडल खेलों के स्वर्ण पदक विजेता मनोज कुमार को अर्जुन पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनका संबंध किस खेल से है? – मुक्केबाजी
9. किस देशों ने जर्मन नाजी साम्राज्य में बड़े पैमाने पर मारे गए यहूदियों में से बचे हजारों यहूदियों के लिए मुआवजा देने हेतु 60 मिलियन अमेरिकी डॉलर के एक समझौते पर हस्ताक्षर किए? – फ्रांस – अमेरिका
10. हाल ही में भारत ने किस देश के साथ साइबर सुरक्षा और ग्रीन आईसीटी के क्षेत्र में सहयोग करने का निर्णय लिया? – जापान
11. हाल ही में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय ने अरुणाचल प्रदेश में सड़क निर्माण परियोजनाओं हेतु कितने करोड़ रुपये की मंजूरी प्रदान की है? – रु. 90 करोड़
12. केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्रालय ने ओएनजीसी की गैस खोज परियोजना में देरी की जाँच के लिए किस समिति का गठन किया है? – तालुकर समिति
13. एफआईआई (FII) द्वारा 75% हिस्सेदारी प्राप्त करने वाली पहली सूचीबद्ध भारतीय कंपनी कौन–सी है? – एचडीएफसी
14. हाल ही में किस कंपनी ने भारतीय भाषा इंटरनेट गठबंधन बनाने की घोषणा की है? – गूगल
15. हाल ही में भारती ने किस देश को हराकर तीसरी महिला सैफ चैंपियनशिप जीती? – नेपाल
16. डेविस कप–2014 का खिताब किस देश ने जीता? – स्विट्जरलैंड
17. हाल ही में यूनाइटेड किंगडम ने मीना सलमान बंदरगाह पर एक स्थायी नौसेना बेस स्थापित करने के लिए किस खाड़ी देश के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किए? – बहरीन
18. हाल ही में भारत ने किस देश के साथ मल्टी रोल फाइटर एयरक्राफ्ट के विकास के लिए अंतर सरकारी समझौते पर हस्ताक्षर किए? – रूस
19. हाल ही में किस मंत्रालय ने मैत्रेयी अंतरराष्ट्रीय विजिटिंग प्रोफेसरशिप का आरंभ किया है? – विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्रालय
20. हाल ही में भारत–रूस अंतर ​सरकारी आयोग का बीसवाँ सत्र किस स्थान पर आयोजित किया गया? – नई दिल्ली
21. किस बैंक ने फेसबुक आधारित धन हस्तांतरण प्लेटफार्म केपे की शुरूआत की है? – कोटक महिंद्रा
22. हाल ही में इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन ने कनाडा के किस प्रांत से तरलीकृत प्राकृतिक गैस प्राप्त करने के लिए 4 बिलियन अमेरिकी डॉलर के निवेश करने की घोषणा की है? – ब्रिटिश कोलंबिया
23. कुछ ही ​घंटों में दुनिया के किसी भी कोने में स्थित लक्ष्य को बेधने में सक्षम एडवांस हाइपरसोनिक वेपन का किस देश द्वारा किया गया पहला परीक्षण विफल हो गया? – अमेरिका
24. किस भारतीय क्रिकेट खिलाड़ी को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद ने विश्व कप 2015 का एंबेस्डर नियुक्त किया है? – विराट कोहली
25. हाल ही में दक्षिण कोरिया के जेजू में आयोजित आठवीं विश्व ​महिला मुक्केबाज चैंपियनशिप देवी और स्वीटी ने अपने–अपने वर्ग में कौन–सा पदक जीता? – रजत
26. हाल ही में लुइस हैमिल्टन अबु धाबी ग्रां पी जीतकर दूसरी बार फार्मूला वन विश्व चैंपियन बने। उनका संबंध किस टीम से है? – मर्सिडीज
27. किस देश ने दक्षिण चीन सागर विवाद को हाल करने के लिए संयुक्त राष्ट्र की मध्यस्थता को खारिज कर दिया है? – चीन
28. हाल ही में किस देश के राष्ट्रपति ने संविधान में संशोधन करने के प्रयास के फलस्वरूप जनता के हिंसक विरोध के बाद अपने पद से इस्तीफा दे दिया? – बुर्किनाफासो
29. किस शहर ने भारत में वर्ष 2014 में सबसे अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या दर्ज कराई? – मुंबई
30. वाइब्रेंट गुजरात वैश्विक निवेशक शिखर सम्मेलन–2015 हेतु कौन–सा देश सहयोगी बना? – अमेरिका
31. हाल ही में भारत में किस कैरेबियाई देश से टैक्स सूचना साझेदारी समझौता किया है? – सेंट किट्स एंड नेविस
32. पत्रिका फॉर्च्यून द्वारा जारी ‘बिजनेस पर्सन ऑफ द ईयर’ की सूची में भारतीय मूल के किस व्यक्ति को शामिल नहीं किया गया है? – इंद्रा नूई
33. विश्व शतरंज चैंपियनशिप–2014 का खिताब किस खिलाड़ी ने जीता? – मैग्नस कार्

मंगलवार, 5 मई 2015

सामान्य ग्यान


आविष्कार और आविष्कारक
आविष्कार / खोज आविष्कारक / खोजकर्ता देश वर्ष
आर्कीमिडीज सिद्धान्त आर्कीमिडीज यूनान 287 ईसा पूर्व-212 ईसा पूर्व
बीजगणित अल-ख्वारिज्मी फारस 750-850 ई.
अर्गाण्ड लैम्प अमी अर्गाण्ड फ्रान्स 1750-1803
थर्मामीटर गैलिलियो गैलीली इटली 1593
खगोलीय दूरदर्शक गैलिलियो गैलीली इटली 1609
बैरोमीटर इव्हांगेलिस्टा टोर्रिसेली इटली 1643
पेण्डुलम घड़ी क्रिश्चन हाइजेन्स नीदरलैण्ड 1656
गुरुत्वाकर्षण का सिद्धान्त सर आइजेक न्यूटन इंग्लैण्ड 1665
प्रकाश का वेग ओलाउस रोमर डेनमार्क 1675
गति के नियम सर आइज़ैक न्यूटन इंग्लैण्ड 1687
मशीन गन जेम्स पक्ले इंग्लैण्ड 1718
एफ एम रेडियो एड्विन एच आर्मस्ट्रांग संयुक्त राज्य अमेरिका
हाइडालिक क्रेन विलियम जार्ज आर्मस्ट्रांग यू. के.
पोर्टलैण्ड सिमेन्ट जोसेफ आस्पदिन इंग्लैण्ड
विश्लेषी इंजन चार्ल्स बाबेज इंग्लैण्ड
आवर्धक लेंस रोजर बेकन इंग्लैण्ड
बैकेलाइट लिओ बेकलैण्ड संयुक्त राज्य अमेरिका
बाइफोकल लेंस बेंजामिन फ्रेंकलिन संयुक्त राज्य अमेरिका 1760
पैराशूट लुइस एस. लेनोर्मांड फ्रांस 1783
लोकोमोटिव रिचार्ड ट्रेव्हिथिक इंग्लैण्ड 1804
साईकल कार्ल डी. वॉन सौरब्रोन जर्मनी 1816
इलेक्ट्रिक मोटर माइकल फैराडे इंग्लैण्ड 1822
माइक्रोफोन चार्ल्स व्हीटस्टोन इंग्लैण्ड 1827
ओम का नियम जॉर्ज एस. ओम जर्मनी 1827
एसी डॉयनेमो माइकल फैराडे इंग्लैण्ड 1832
तार (टेलीग्रॉफ) सैमुएल एफ. बी. मोर्स संयुक्त राज्य अमेरिका 1837
सिलाई मशीन एलियास होवे संयुक्त राज्य अमेरिका 1846
सेफ्टी पिन वाल्टर हण्ट संयुक्त राज्य अमेरिका 1849
एलिवेटर एलिशा जी. ओटिस संयुक्त राज्य अमेरिका 1852
प्लास्टिक अलैक्जेण्डर पार्क्स इंग्लैण्ड 1855
बारूद (डाइनामाइट) अल्फ्रेड नोबल स्वीडन 1867
इलेक्ट्रिक लैम्प ए. ई. बेक्वेरेल फ्रांस 1867
टाइपराइटर क्रस्टोफर शोलेज और कार्लोस ग्लिडन संयुक्त राज्य अमेरिका 1867
डीएनए फ्रिडरिक मेशर जर्मनी 1869
मोटरसाईकल एडवर्ड बटलर इंग्लैण्ड 1884
फाउण्टेन पेन लेविस ई. वाटरमैन संयुक्त राज्य अमेरिका 1884
इलेक्ट्रिक ट्रांसफार्मर विलियम स्टेनले संयुक्त राज्य अमेरिका 1885
कोका-कोला जॉन पेम्बर्टन संयुक्त राज्य अमेरिका 1886
इलेक्ट्रोकॉर्डियोग्राफी आगस्तुस वाल्टर ब्रिटेन 1887
डॉयनेमो निकोला टेस्ला संयुक्त राज्य अमेरिका 1892
डीजल इञ्जन रुडोल्फ डीजल जर्मनी 1892
स्टोव हडावे संयुक्त राज्य अमेरिका 1896
इलेक्ट्रॉन सर जोसेफ जे. थॉम्पसन इंग्लैण्ड 1897
रेडियोधर्मिता (एक्स रे) मैडम क्यूरी और पियरे क्यूरी फ्रांस 1898
एस्पिरिन डॉ. फेलिक्स होफमेन जर्मनी 1899
टेप रेकॉर्डर वाल्डेमर पौल्सेन डेनमार्क 1899
क्वाण्टम सिद्धान्त मैक्स प्लैंक जर्मनी 1900
रेज़र किंग जिलेट संयुक्त राज्य अमेरिका 1901
मनोविश्लेषण सिगमण्ड फ्रॉयड ऑस्ट्रिया 1904
धुलाई मशीन एल्वा फिशर संयुक्त राज्य अमेरिका 1906
E=mc2 अलबर्ट आइंस्टाइन स्विटज़रलैण्ड 1907
एयरकण्डीशनिंग विलिस कैरियर संयुक्त राज्य अमेरिका 1911
अणु अर्नेस्ट रदरफोर्ड इंग्लैण्ड 1911
अभिकलित्र (कम्प्यूटर) वानेवर बुश संयुक्त राज्य अमेरिका 1928
कार रेडियो विलियम लीर और एल्मर वैवरिंग संयुक्त राज्य अमेरिका 1929
बॉल पाइण्ट पेन लाज़्लो बिरो अर्जेण्टीना 1944
माइक्रोवेव ओवन पर्सी स्पेन्सर संयुक्त राज्य अमेरिका 1947
एकीकृत सर्किट जी.डब्लू.ए. डमर इंग्लैण्ड 1952
एलसीडी होफमन-ला रोश स्विटज़रलैण्ड 1970
कॉम्पैक्ट डिस्क (सीडी) आरसीए संयुक्त राज्य अमेरिका 1972
सापेक्षता का सिद्धांत अल्बर्ट आइंस्टाइन स्विटज़रलैण्ड 1905-1953

science विग्यान


सामान्य ज्ञान वस्तुनिष्ट प्रश्न-उत्तर – सामान्य विज्ञान
1. एक रोगी को, जो लंबी बीमारी से पीडित है और प्रतिजीवी व्यवस्था पर है, उसके आहार में प्रोबायोटिक्स लेने की सलाह दी जाती है। ये प्रोबायोटिक्स पूरक हैं जिनमें आवश्यक मात्रा में–
(A) प्रोटीन होते हैं (B) विटामिन होते हैं (C) लैकिटक अम्ल जीवाणु होते हैं (D) विधुत अपघटय होते हैं
Ans : (C)

2. सर्वाधिक कठोर तत्व निम्न में कौन है?
(A) हीरा (B) सीसा (C) टंग्स्टन (D) लोहा
Ans : (A)

3. कार्बन डेटिंग का प्रयोग किसकी उम्र निर्धारित करने के लिए किया जाता है?
(A) वृक्षों की (B) पृथ्वी की (C) फॉसिल्स की (D) चटटानों की
Ans : (C)

4. भारत में परमाणु ऊर्जा का उत्पादन किस वर्ष आरम्भ हुआ?
(A) 1956 (B) 1967 (C) 1969 (D) 1974
Ans : (C)

5. भारतीय अन्तरिक्ष कार्यक्रम का क्या उद्देश्य नहीं है?
(A) दूर संचार का विस्तार (B) प्राकृतिक सम्पदा की खोज (C) देश की सुरक्षा की निगरानी करना (D) मौसम की जानकारी प्राप्त करना
Ans : (C)

6. अन्टार्कटिका में प्रथम भारतीय स्थायी प्रयोगशाला को क्या नाम दिया गया?
(A) दक्षिण गंगोत्री (B) मैत्री (C) यमनोत्री (D) गंगोत्री
Ans : (A)

7. तार–सड़क कब आसानी से टूट जाती है?
(A) ग्रीष्म (B) शीत (C) बारिश में (D) व्यस्त ट्रैफिक
Ans : (A)

8. एक घड़ी प्रात: के 8 बजे का समय दर्शा रही है। घड़ी में अपरान्ह के 2 बजे तक घंटे की सुई कितने अंश घूमेगी–
(A) 150º (B) 144º (C) 168º (D) 180º
Ans : (D)

9. किसी घड़ी की घंटे की सुई और मिनट की सुई एक दिन में कितना बार परस्पर समकोण पर होती हैं?
(A) 44 (B) 48 (C) 24 (D) 12
Ans : (B)

10. भारत के अन्टार्कटिका में द्वितीय स्थायी स्टेशन को क्या नाम दिया गया?
(A) दक्षिण गंगोत्री (B) मयनोत्री (C) दक्षिण यमनोत्री (D) मैत्री
Ans : (D)

11. निम्नलिखित में से कौन–सा तत्व मनुष्य में प्राकृतिक रूप में नहीं होता?
(A) ताँबा (B) जस्ता (C) आयोडीन (D) सीसा
Ans : (D)

12. सर्विस स्टेशन पर मोटर कारों के ‘प्रदूषण जाँच’ में निम्नलिखित में से किसकी पहचान तथा उसकी मात्रा को मापा जाता है?
(A) सीसा तथा कार्बन कण (B) नाइट्रोजन तथा सल्फर के ऑक्साइड (C) कार्बन मोनोक्साइड (D) कार्बन डाइऑक्साइड
Ans : (B)

13. गोल्डन धान अच्छा स्रोत है–
(A) वसा का (B) प्रेटीन का (C) विटामिन ‘ए का (D) विटामिन ‘बी का
Ans : (C)

14. ‘इलिसा (ELISA) परीक्षण किया जाता है–
(A) एडस पहचानने के लिए (B) क्षयरोग की पहचान के लिए (C) मधुमेह (Diabetes) की पहचान के लिए (D) टायफाइड की पहचान के लिए
Ans : (A)

15. निम्न में कौन बायो–डीजल पौधा है?
(A) जावा घास (B) रतनजोत (C) गुग्गुल (D) रोशा घास
Ans : (B)

16. वह रेडियो–समस्थानिक जिसे परिवहन तन्त्र में खून के थक्के का पता लगाने हेतु प्रयोग में लाया जाता है, वह है–
(A) आर्सेनिक–74 (B) कोबाल्ट–60 (C) आई–131 (D) सोडियम–24
Ans : (D)

17. पराध्वनिक जेट प्रदूषण पैदा करता है, पतला करके–
(A) O3 परत को (B) O2 परत को (C) SO2 परत को (D) CO2 परत को
Ans : (A)

18. निम्न में से किसे ‘जगल की आग’ कहा जाता है?
(A) बोहिनिय वेरीगेटा (B) जेकेरान्डा मैसोसाफोलिया (C) ब्युटिया मोनोस्पर्मा (D) टेक्टोना ग्रांडिस
Ans : (C)

19. ‘ब्लैक होल के सिद्धांत को प्रतिपादित किया था–
(A) सी. वी. रमन ने (B) एच. जे. भाभा ने (C) एस. चंद्रशेखन ने (D) एच. खुराना ने
Ans : (C)

20. डाटा के प्रेषण की गति को मापने के लिए सामान्यत: प्रयुक्त एकक है–
(A) मेगा हर्टज (B) संप्रतीक प्रति सेंकड (C) बिट प्रति सेकंड (D) नैनो सेकंड
Ans : (C)

सामान्य ग्यान



1. बी. पी. ओ. (BPO) का पूर्ण रूप है–
(A) भारत पेट्रोलियम आर्गेनाइजेशन (B) बिजनेस प्रोसेस आउटसोर्सिंग
(C) बिजनेस प्रोडक्टस आउटसोर्सिंग (D) भारत पेस्टीसाइडस आउटलेट
Ans : (B)

2. एस. एम. एस. (SMS) का अर्थ है–
(A) सिवफ्ट मेल सिस्टम (B) शॉर्ट मैसेजिंग सर्विस
(C) शार्टहैण्ड मैन्युअल सिक्रप्ट (D) स्पीड मेल सर्विस
Ans : (B)

3. ईसाइयों का गुड फ्राइडे क्यों मनाया जाता है?
(A) ईसा मसीह की मृत्यु हुई थी (B) ईसा मसीह का जन्म हुआ था
(C) ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था (D) ईसवी सन का प्रारम्भ हुआ था
Ans : (C)

4. भारत वर्ष में दूरभाष की शुरूआत किस वर्ष हुई?
(A) 1951 (B) 1981 (C) 1951 (D) 1961
Ans : (C)

5. ‘सागर सम्राट निम्नलिखित में से किसका नाम है?
(A) पोर्ट ब्लेयर के निकट एक द्वीप का (B) ‘बाम्बे हाई में एक वेधन जहाज का
(C) मालदीव के निकट एक द्वीप का (D) गोवा में स्थित एक 5–स्टार होटल का
Ans : (B)

6. किस स्थान समूह में हर बारहवें वर्ष कुम्भ मेला होता है?
(A) प्रयाग–हरिद्वार–उज्जैन–नासिक (B) चित्रकूट–उज्जैन–प्रयाग–हरिद्वार
(C) रामेश्वरम–पुरी–बद्रीनाथ–द्वारिका (D) उज्जैन–पुरी–प्रयाग–हरिद्वार
Ans : (A)

7. यहूदियों का पूजा–स्थल क्या कहलाता है?
(A) चर्च (B) सिनेगाँग (C) मसिजद (D) इनमें से कोई नहीं
Ans : (B)

8. ‘सागर कन्या जहाज का इस्तेमाल किया जा रहा है–
(A) खनिज तेल ढोने में (B) मछली पकड़ने में
(C) समुद्र विज्ञान और मौसम विज्ञान के क्षेत्र में (D) समुद्री व्यापार में
Ans : (C)

9. भारत में प्रौढ़ शिक्षा कार्यक्रम कब आरम्भ किया गया?
(A) 1961 (B) 1976 (C) 1978 (D) 1986
Ans : (C)

10. निम्न में से कौन एक आधुनिक नियोजित नगर है?
(A) कोलकाता (B) वाराणसी (C) चेन्नई (D) चण्डीगढ़
Ans : (D)

11. कोरु क्यों प्रसिद्ध है?
(A) फ्रेंच ग्याना स्थित राकेट लॉचिंग स्टेशन (B) कोरिया की मुद्रा
(C) उत्तरी कोरिया की राजधानी (D) ईरान स्थित तेल भण्डार क्षेत्र
Ans : (A)

12. मंगल ग्रह पर उतरने वाला प्रथम अंतरिक्ष यान कौन–सा था?
(A) कोलमिब्या (B) जेनेसस–1 (C) वाइकिंग–1 (D) डिस्कवरी
Ans : (C)

13. किस पेट्रोलियम कम्पनी ने ‘स्पीड (Speed)’ नामक एक उच्च गुणवत्ता वाले पेट्रोल को बाजार में उतारा?
(A) भारत पेट्रोलियम (B) इणिडयन आयल (C) हिन्दुस्तान पेट्रोलियम (D) इनमें से कोई नहीं
Ans : (A)

14. बद्रीनाथ मन्दिर उत्तराखंड के किस जनपद में स्थित है?
(A) चमोली (B) टिहरी (C) उत्तरकाशी (D) रुद्रप्रयाग
Ans : (A)

15. ”बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय आदर्श है–
(A) आल इण्डिया  रेडियो का (B) दूरदर्शन का
(C) लाइफ इंश्योरेन्स कारपोरेशन ऑफ इंडिया का (D) जनरल इंश्योरेन्स कारपोरेशन ऑफ इंडिया का
Ans : (C)

16. चिपको आन्दोलन किससे सम्बन्धित है?
(A) आदिवासी विवाह प्रथा से (B) वृक्षों को काटने से बचाने से (C) मत्स्य संरक्षण से (D) जल संरक्षण से
Ans : (B)

17. श्री हरिकोटा किस राज्य में स्थित है?
(A) केरल (B) आन्ध्र प्रदेश (C) देहरादून (D) बंगलौर
Ans : (B)

18. इंडिया हाउस कहाँ स्थित है?
(A) नई दिल्ली (B) कोलकाता (C) लन्दन (D) न्यूयॉर्क
Ans : (C)

19. डी–दिवस (डी–डे) वह दिन है जब–
(A) जर्मनी ने ब्रिटेन के साथ युद्ध छेड़ा (B) संयुक्त राज्य अमेरिका ने हिरोशिमा पर परमाणु बम छोड़ा
(C) मित्र सेनाएँ नार्मण्डी में उतरीं (D) जर्मनी ने मित्र राष्ट्रों के समक्ष समर्पण कर दिया
Ans : (C)

20. एंग्लो–नूबियन किसकी नस्ल है?
(A) भेड़ (B) बकरी (C) कुक्कुट (D) पशु
Ans : (A)

21. भारत में निम्नलिखित में से वह स्थलस्मारक कौन–सा है, जो यूनेस्को की विश्व सांस्कृतिक धरोहर की सूची में शामिल नहीं है?
(A) एलोरा की गुफाएँ (B) काशी विश्वनाथ मन्दिर (C) कुतुबमीनार (D) मानस वन्य प्राणी अभयारण्य
Ans : (B)

22. निम्नलिखित में से भारत का वह स्थलस्मारक कौन–सा है, जो यूनेस्को की विश्व सांस्कृतिक धरोहर की सूची में शामिल नहीं है?
(A) तिरुपति–तिरुमाला मन्दिर (B) आगरा फोर्ट (C) दिल्ली में हुमायूँ का मकबरा (D) केवलादेव नेशनल पार्क
Ans : (A)

23. इकेबाना किसका जापानी रूप है?
(A) आधुनिक चित्रकारी का (B) युद्ध कला का (C) फूलों की सजावट का (D) कृषि की विधि का
Ans : (C)

24. चित्रों के ऐसे संग्रह को क्या कहते हैं, जिनका निवेश प्रलेखों में किया जा सकता है?
(A) फोटो शॉप (B) ऑटो आकृतियाँ (C) शब्द कला (D) क्लिप कला
Ans : (D)

25. राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग के अधिनियम, 1993 के अनुसार, निम्नलिखित में से कौन इस आयोग का अध्यक्ष बन सकता है?
(A) उच्चतम न्यायालय का कोई सेवारत न्यायाधीश (B) उच्च न्यायालय का कोई सेवारत न्यायाधीश
(C) केवल भारत के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायमूर्ति (D) केवल उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायमूर्ति
Ans : (C)



सोमवार, 4 मई 2015

चन्द्रगुप्त


पूरा नाम चक्रवर्ती सम्राट चन्द्र गुप्त मौर्य
जन्म 340 ई. पू.
जन्म भूमि मगध, भारत
मृत्यु तिथि 298 ई पू (42 वर्ष में)
मृत्यु स्थान श्रवण बेल्गोला, कर्नाटक
पिता/माता "मुरा या मोरा" (माता)
संतान बिन्दुसार
उपाधि सम्राट
राज्य सीमा सम्पूर्ण भारत (लगभग)
शासन काल 322 से 298 ई. पू.
शा. अवधि 24 वर्ष (लगभग)
राज्याभिषेक 322 ई.पू.
धार्मिक मान्यता वैदिक और जैन
प्रसिद्धि भारत का प्रथम 'ऐतिहासिक सम्राट'
राजधानी पाटलिपुत्र
पूर्वाधिकारी धनानंद
वंश मौर्य वंश